वर्तमान संदर्भ में ई-बैंकिंग प्रणाली की उपयोगिता पर एक अध्ययन

  • कपिल कुमार दुबे रिसर्च स्कॉलर, मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी, सीहोर

Abstract

सारांश: ई-बैंकिंग, जिसे इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग के रूप में भी जाना जाता है, बैंकिंग क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण तकनीकी प्रगति के रूप में उभरी है। इस शोध पत्र का उद्देश्य वर्तमान संदर्भ में ई-बैंकिंग प्रणालियों की उपयोगिता की विस्तृत व्याख्या करना हैं। वर्तमान साहित्य की समीक्षा, आंकड़ों का विश्लेषण और सर्वेक्षण आयोजित करके, यह अध्ययन ई-बैंकिंग के लाभों, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं की जांच करता है। निष्कर्ष रूप में शोध कहता हैं कि ई-बैंकिंग ग्राहकों और वित्तीय संस्थानों दोनों को एक सुविधा प्रदान करता हैं।और सुविधाओ की पहुँच व दक्षता पर प्रकाश डालता हैं।इसके अलावा यह शोध पेपर ई-बैंकिंग से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं पर चर्चा करता है और जोखिमों को कम करने के लिए रणनीतियों का सुझाव देता है। कुल मिलाकर, यह शोध आधुनिक बैंकिंग के संचालन में ई-बैंकिंग की भूमिका और हितधारकों के लिए इसके उचित ढंग से उपयोग व उससे जुड़ी प्रत्येक क्रिया व कार्यप्रणाली की गहरी समझ को बढ़ाने में योगदान देता है।ई बैंकिग वर्तमान जगत में जन जन के लिए उपयोगी हैं इसके लिए उसके कार्यकलापों को विस्तृत व्याख्या इस शोध का उद्देश्य हैं।इंटरनेट या डिजिटल बैंकिंग के इस समय मे आज हर व्यक्ति के हाथ में ऑनलाइन बैंकिंग के विकल्प उपलब्ध हैं जिनका उपयोग प्रत्येक व्यक्ति अपनी सुविधा के अनुसार करता हैं लेकिन यह भी सत्य हैं कि एक बड़ा प्रतिशत इस प्रणाली का उपयोग करने में डरता भी हैं क्योकि उसे उसकी जमा राशि की सुरक्षा का डर रहता हैं कि कहीं उसके साथ कोई ऑनलाइन फ्रॉड न हो जाये या तकनीक से अनभिज्ञ या कम जानकार व्यक्ति भी इसके उपयोग से डरता हैं तो इस शोध के माध्यम से उपयोगिता के साथ साथ बिना भय के ई बैंकिंग प्रणाली को अपनाने के प्रति जागरूक करना हैं। कीवर्ड: ई-बैंकिंग, इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग, ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल बैंकिंग, उपयोगिता, सुविधा, सुरक्षा, दक्षता।
How to Cite
कपिल कुमार दुबे. (1). वर्तमान संदर्भ में ई-बैंकिंग प्रणाली की उपयोगिता पर एक अध्ययन. International Journal Of Innovation In Engineering Research & Management UGC APPROVED NO. 48708, EFI 8.059, WORLD SCINTIFIC IF 6.33, 13(2), 38-43. Retrieved from http://journal.ijierm.co.in/index.php/ijierm/article/view/3396
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