महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका

  • प्रीति उपाध्याय

Abstract

हाल ही में भारत सरकार ने बजट 2019-20 में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को बढ़ावा देने तथा देश की विकास प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए स्वयं सहायता समूह को दिए जाने वाले ब्याज सब्सिडी कार्यक्रमों का सभी जिलों में विस्तार करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही जनधन बैंक खाते वाले स्वयं सहायता समूह की प्रत्येक महिला एसएचजी सदस्य को 5000 रूपये तक की ओवरड्रफ्ट की सुविधा भी दी जाएगी। विकासशील देशों के लिए स्वयं सहायता समूह जमीनी-स्तर पर जनसामान्य के आर्थिक सशक्तिकरण का एक प्रमुख माध्यम है। वहीं दूसरी ओर इस अवधारणा को न केवल सामान्य लोगों द्वारा अपनाया जाता है बल्कि दुनियाभर की सरकारी व गैर-सरकारी संस्थाएँ भी स्वयं सहायता समूह के महत्व को बखूबी समझती हैं। इस अध्ययन का उद्देश्य महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका को उजागर करने का प्रयास किया गया है। यह अध्ययन पूर्ण रूप से वर्णनात्मक एवं द्वितीय आंकडों पर आधारित है। मूल शब्दः स्वयं सहायता समूह, आर्थिक सशक्तिकरण, महिला, रोजगार, स्वरोजगार।
How to Cite
प्रीति उपाध्याय. (1). महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका. International Journal Of Innovation In Engineering Research & Management UGC APPROVED NO. 48708, EFI 8.059, WORLD SCINTIFIC IF 6.33, 10(2), 72-79. Retrieved from http://journal.ijierm.co.in/index.php/ijierm/article/view/1237