श्रीमद वाल्मिकी रामायण स्त्री शिक्षा दशाच
Abstract
प्रस्तावना भारतीय सभ्यता समाज और संस्कृति में परम्परा रीति-रिवाज साहित्य की परम आवश्यकता होती है। कहते है आवश्यकता अविष्कार की जननी है। अर्थात हर शब्द में ब्रह्म है और हर शब्दमें शक्ति होती है। उसी प्रकार साहित्य समाज का दर्पण होता है वो ही दर्पण समाज की दिशा निर्देश करता है समाज को जोड़ने के लिए भी साहित्य की आवश्यकता होती है ठीक उसी प्रकार सामाजिक समर सता हेतु स्त्री और पुरुष दोनों ही धूरी होते है उसी समाज में नारी शक्ति की पूजा उपासना भी होती है। बिना नारी के समाज और साहित्य की कल्पना अधूरी है अतः नारी ही समाज संस्कृति और साहित्य की संरचना है। इसलिए समाज को उन्नति प्रदान करने के लिए स्त्री शिक्षा आवश्यक है।
How to Cite
शीतल अहिरवार. (1). श्रीमद वाल्मिकी रामायण स्त्री शिक्षा दशाच. International Journal Of Innovation In Engineering Research & Management UGC APPROVED NO. 48708, EFI 8.059, WORLD SCINTIFIC IF 6.33, 10(2), 12-15. Retrieved from http://journal.ijierm.co.in/index.php/ijierm/article/view/1190
Section
Articles








